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ज्योतिष Journal · Transits & timing

Separate an exact moment from a longer season

Transits, returns, retrogrades, profections, progressions, planetary motion, visibility, and timing methods with their calculations and uncertainty made explicit.

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इस विषय में

Transits & timing संग्रह

49–60 तक, कुल 76 गाइड।

19 मिनट का पठन

यूरेनस रिटर्न चार्ट: गणना और व्याख्या

यूरेनस रिटर्न तब होता है जब गोचर करता यूरेनस उसी राशि-देशांतर पर लौटता है जहाँ वह जन्म के समय था। यह केवल यूरेनस का जन्मकालीन राशि में प्रवेश, कोई व्यापक युति, या लगभग चौरासी वर्ष की आयु में जन्मदिन पर पहुँचना नहीं है। पुनरुत्पाद्य रिटर्न सटीक देशांतर-मिलान निकालता है।

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बृहस्पति वापसी कुंडली: गणना और व्याख्या

बृहस्पति वापसी तब होती है जब गोचर बृहस्पति उसी राशिचक्रीय देशांतर पर लौटता है जहाँ वह जन्म के समय था। यह केवल बृहस्पति का जन्म-राशि में प्रवेश या ढीली युति तक पहुँचना नहीं है। पुनरुत्पाद्य गणना सटीक देशांतर-मिलान हल करती है और उस समय-मुद्रा तथा घोषित स्थान की कुंडली बनाती है।

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मंगल वापसी कुंडली: गणना और व्याख्या

मंगल वापसी तब होती है जब गोचर का मंगल उसी राशि-देशांतर पर लौटता है जहाँ वह जन्म के समय था। इसका अर्थ केवल मंगल का जन्मकालीन राशि में प्रवेश करना या किसी विस्तृत युति के भीतर आना नहीं है। गणना देशांतर की सटीक समानता खोजती है और फिर उस समय-मुद्रा तथा घोषित स्थान के लिए कुंडली बनाती है।

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शुक्र वापसी कुंडली: गणना और व्याख्या

शुक्र वापसी तब होती है जब गोचर का शुक्र उसी उष्णकटिबंधीय या नाक्षत्र राशि-पद्धति में उस भूकेन्द्रीय क्रांतिवृत्तीय देशांतर पर पहुँचता है जहाँ वह जन्म के समय था। यह केवल शुक्र का जन्मकालीन राशि में प्रवेश करना नहीं है और न ही ग्रह का सूर्य के चारों ओर 224.7 दिन की एक कक्षा पूरी करना। गणना को देशांतर की सटीक समानता खोजनी और हर प्रत्यक्ष, वक्री तथा अंतिम प्रत्यक्ष पारगमन पकड़ना चाहिए।

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बुध वापसी कुंडली: गणना और व्याख्या

बुध वापसी सटीक देशांतर घटना है, केवल बुध का जन्मकालीन बुध-राशि में प्रवेश नहीं। घोषित उष्णकटिबंधीय या नाक्षत्र राशि-चक्र में जन्म ग्रह निकालें, उस देशांतर के हर बाद के पार को खोजें, प्रत्येक समय सुधारें और बुध की सीधी, स्थिर या वक्री अवस्था बचाएँ। पास का वक्री चक्र छोटे अंतराल में तीन वापसी बना सकता है।

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चंद्र वापसी कुंडली: गणना और व्याख्या

चंद्र वापसी न कैलेंडर महीने का पहला दिन है, न केवल चंद्रमा का आपके जन्म-राशि में प्रवेश। गणना वह क्षण खोजती है जब गोचर चंद्रमा जन्मकालीन चंद्रमा के लिए प्रयुक्त उसी उष्णकटिबंधीय या नाक्षत्र क्रांतिवृत्तीय देशांतर पर पहुँचे। चंद्रमा तेज चलता है, इसलिए सटीक समय-मुद्रा और घोषित राशि-चक्र अनिवार्य हैं।

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ज्योतिष में टर्शियरी प्रोग्रेशन: विधियाँ और गणना

ज्योतिष में टर्शियरी प्रोग्रेशन की व्याख्या से पहले विधि का नाम जरूरी है। टर्शियरी I में जन्म के बाद ग्रहों की एक दिन की गति जीवन के एक ट्रॉपिकल चंद्र-माह के बराबर होती है। टर्शियरी II में पंचांग का एक ट्रॉपिकल चंद्र-माह जीवन के एक ट्रॉपिकल वर्ष के बराबर होता है। सॉफ्टवेयर और लेखों में नाम मिलते-जुलते हों, फिर भी दोनों कुंडलियाँ परस्पर बदलने योग्य नहीं हैं।

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ज्योतिष में सोलर आर्क डायरेक्शन्स: विधि और गणना

सोलर आर्क डायरेक्शन्स ज्योतिष की प्रतीकात्मक समय-विधि है। पहले जन्म सूर्य से सेकेंडरी प्रोग्रेस्ड सूर्य की चली दूरी निकालें। फिर वही आर्क हर जन्म देशांतर में जोड़ें। निर्देशित चार्ट की तुलना जन्मकुंडली से, अक्सर ग्रहों और कोणों के कसे पहलुओं द्वारा, की जाती है।

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ज्योतिष में सेकेंडरी प्रोग्रेशन्स: दिन-प्रति-वर्ष मार्गदर्शिका

सेकेंडरी प्रोग्रेशन्स ज्योतिष की समय-विधि है जो जन्म के बाद एक दिन को जीवन के एक वर्ष से जोड़ती है। तीस वर्ष की आयु पढ़ने के लिए डायरेक्ट सेकेंडरी प्रोग्रेशन दर्ज जन्म-क्षण के लगभग तीस दिन बाद की ग्रह-स्थितियाँ देखता है। उनकी तुलना जन्मकुंडली और उपयोगी होने पर आपस में की जाती है। प्रोग्रेस्ड तारीख प्रतीकात्मक कुंजी है, घटना की अनिवार्य कैलेंडर तारीख नहीं।

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ज्योतिष में प्राथमिक दिशाएँ: विधि और समय-कुंजियाँ

प्राथमिक दिशाएँ आकाशीय गोले के दिखाई देने वाले दैनिक घूर्णन पर आधारित पारंपरिक ज्योतिषीय समय-निर्धारण तकनीक हैं। किसी दिशा में प्रोमिसर कहलाने वाले जन्मकालीन कारक को सिग्निफिकेटर कहलाने वाले दूसरे कारक की स्थिति, दृष्टि या स्थिति-वृत्त की ओर ले जाया जाता है। प्राप्त चाप को चुनी गई समय-कुंजी से जीवन के प्रतीकात्मक वर्षों में बदला जाता है।

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ज्योतिष में फिरदारिया: ग्रह अवधियों की व्याख्या

फिरदारिया मध्यकालीन फ़ारसी-अरबी ज्योतिष की समय-निर्धारण तकनीक है, जो जीवन को सात पारंपरिक ग्रहों और चंद्र नोडों द्वारा शासित मुख्य अवधियों में बाँटती है। दिन की कुंडली सूर्य से और रात की कुंडली चंद्रमा से शुरू होती है। हर ग्रह के वर्षों की संख्या निश्चित है और ग्रहीय मुख्य अवधियाँ सात समान उप-अवधियों में बँटती हैं।

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ज्योतिष में राशिचक्र विमोचन: व्यावहारिक मार्गदर्शिका

राशिचक्र विमोचन हेलेनिस्टिक ज्योतिष की समय-निर्धारण तकनीक है जो गणना किए गए लॉट से शुरू होकर क्रमशः राशियों को अवधियाँ देती है। लॉट ऑफ़ स्पिरिट आम तौर पर कर्म, दिशा और व्यवसाय के लिए तथा लॉट ऑफ़ फ़ॉर्च्यून शरीर से जुड़ी परिस्थितियों और प्राप्त दशाओं के लिए इस्तेमाल होता है। हर राशि को उसके स्वामी ग्रह के पारंपरिक वर्ष मिलते हैं और हर बड़ी अवधि उसी क्रम से छोटी अवधियों में बाँटी जा सकती है।

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