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ज्योतिष Journal · Traditional techniques

Name the method before interpreting the result

Dignities, sect, bounds, triplicity, reception, lots, dispositors, aspect doctrine, and other source-dependent techniques from traditional astrology.

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FIELD NOTES · 04

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इस विषय में

Traditional techniques संग्रह

25–32 तक, कुल 32 गाइड।

17 मिनट का पठन

ज्योतिष में सीमांश: मिस्री टर्म्स की व्याख्या

पारंपरिक ज्योतिष में सीमांश या टर्म्स हर 30-अंश की राशि के असमान उपविभाजन हैं। हर उपविभाजन पाँच पारंपरिक गैर-प्रकाशक ग्रहों में से एक का है: बुध, शुक्र, मंगल, बृहस्पति या शनि। सूर्य और चंद्रमा सीमांश के स्वामी नहीं होते।

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ज्योतिष में त्रितत्त्व स्वामी: दिन और रात की मार्गदर्शिका

पारंपरिक ज्योतिष में हर तत्त्व तीन राशियों का त्रितत्त्व बनाता है और उसका एक दिवा स्वामी, एक रात्रि स्वामी तथा डोरोथियस की पद्धति में एक सहभागी स्वामी होता है। कुंडली का दिवा-रात्रि वर्ग तय करता है कि किस स्वामी को पहली प्राथमिकता मिलेगी। उदाहरण के लिए अग्नि का नेतृत्व दिन में सूर्य और रात में बृहस्पति करता है, जबकि शनि सहभागी है।

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ज्योतिष में पक्ष: दिन और रात की कुंडलियाँ समझें

ज्योतिष में पक्ष एक पारंपरिक सिद्धांत है जो एक व्यावहारिक प्रश्न से शुरू होता है: कुंडली के समय सूर्य स्थानीय क्षितिज के ऊपर था या नीचे? क्षितिज के ऊपर सूर्य होने से दिवाकालीन, अर्थात दिन की कुंडली बनती है। नीचे होने से रात्रिकालीन, अर्थात रात की कुंडली बनती है।

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ज्योतिष में ग्रहों के आनंद: व्यावहारिक मार्गदर्शिका

ज्योतिष में ग्रहों के आनंद की व्यवस्था बुध को पहले भाव, चंद्रमा को तीसरे, शुक्र को पाँचवें, मंगल को छठे, सूर्य को नौवें, बृहस्पति को ग्यारहवें और शनि को बारहवें भाव से जोड़ती है। यह योजना प्राचीन पारंपरिक ज्योतिष में मिलती है और ग्रह के स्वभाव, दिन-रात के पक्ष, दृश्यता तथा कुंडली के विशिष्ट स्थानों के विषयों को जोड़ती है।

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ज्योतिष में आकस्मिक गरिमा: व्यावहारिक मार्गदर्शिका

ज्योतिष में आकस्मिक गरिमा ग्रह को उसकी राशि से परे परिस्थितियों से परखती है। पारंपरिक ज्योतिषी कोणीयता, भाव, मार्गी या वक्री गति, वेग, सूर्य-दृश्यता, दृष्टियाँ, रिसेप्शन, सेक्ट और प्रश्न से प्रासंगिकता देखते हैं। ये स्थितियाँ बताती हैं कि ग्रह खुले, शीघ्र, लगातार या सहयोग के साथ काम कर सकता है या नहीं।

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ज्योतिष में मूल गरिमाएँ: एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका

ज्योतिष में मूल गरिमाएँ पारंपरिक श्रेणियाँ हैं जिनसे आँकते हैं कि खास राशि और अंश से ग्रह अपने कार्य कितनी सहजता से कर सकता है। पाँच सकारात्मक गरिमा प्रकार हैं स्वराशि, उच्च, त्रिक, सीमा या टर्म, और फेस या डेकन। प्रतिकूल राशि और नीच विपरीत दुर्बलताएँ बताते हैं, जबकि इन गरिमाओं में से कोई न रखने वाले ग्रह को अक्सर पेरेग्रिन कहते हैं।

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ज्योतिष में डेकन: राशिचक्र के 36 विभाजनों की व्याख्या

ज्योतिष में डेकन राशिचक्र के 36 लगातार विभाजन हैं, जिनमें प्रत्येक दस अंश का है। हर 30-अंश की राशि में पहला, दूसरा और तीसरा डेकन होता है। किसी राशि के 4 अंश पर ग्रह पहले डेकन में, 16 अंश पर दूसरे में और 27 अंश पर तीसरे में होता है। ज्यामिति सरल है; व्याख्या का स्वामी वह जगह है जहाँ प्रणालियाँ अलग होती हैं।

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ज्योतिष में भाग्य बिंदु: सूत्र, भाव और अर्थ

ज्योतिष में भाग्य बिंदु, जिसे फ़ॉर्चूना भी कहते हैं, एक अरबी भाग या लॉट है। यह ग्रह या क्षुद्रग्रह नहीं है। राशि चक्र में इसका अंश लग्न, सूर्य और चंद्रमा से निकाला जाता है; पारंपरिक सूत्र दिन और रात की कुंडलियों में सूर्य तथा चंद्रमा का क्रम उलट देते हैं।

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